MATH GENERAL KNOWLEDGE ENGLISH QUIZ
मुगल वंश की स्थापना कैसे हुई
1526 ई. में बाबर और इब्राहिम लोदी की सेना के बीच पानीपत के मैदान में युध्द हुआ इस युध्द को पानीपत का प्रथम युध्द कहा जाता है इस युध्द में इब्राहिम लोदी मारा गया और बाबर ने मुगल सत्ता की स्थापना की पानीपत का युध्द भारतीय इतिहास का प्रमुख युध्द था इसके पश्चात ही भारत में मुगल सत्ता की स्थापना हुई
बाबर का संक्षिप्त परिचय
मुगल वंश के संस्थापक बाबर का शासन काल 1526 ई. से 1530 ई. तक चला बाबर का पूरा नाम जहीरूद्दीन मोहम्मद बाबर था
बाबर का जन्म 14 फरवरी 1483 को फरगना मे हुआ था बाबर चगताई तुर्क था अपने पिता उमर शेख की ओर से बाबर तैमूर का वंशज था और अपनी माँ कुतलग निशा की ओर से चंगेज खाँ का वंशज था
11 वर्ष की उम्र में 1494 ई. में यह फरगना का शासक बना 1508 में इसने कंधार पर विजय प्राप्त की यही पर इसके पुत्र हुमायूँ का जन्म हुआ
बाबर कौन सी उपाधि लेना शुरु किया
इसने अपनी सेना में तोप शामिल की और जो पूर्व के सुल्तान हुआ करते थे वो मिर्जा की उपाधि देते थे किंतु इसने ‘पादशाह’ की उपाधि लेना शुरू किया इसने पादशाह की उपाधि ली
बाबर वैसे तो सुन्नी मुसलमान था पर उसने कुछ समय के लिए शिया मत भी स्वीकार किया था (ईरान के शाह से सहायता प्राप्त करने के लिए)
भारत पर आक्रमण करने से पूर्व बाबर ने किन -किन स्थानों पर विजय प्राप्त की
भारत पर आक्रमण करने से पूर्व ये काबुल, कंधार व समकंद आदि पर विजय प्राप्त कर चुका था
बाबर की आत्मकथा
बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा लिखी उसमें उसने लिखा है जब मैंने हिंदुस्तान विजित किया उस समय हिंदुस्तान में पाँच मुसलमान शासकों तथा दो काफिर बादशाहों का शासन था(बाबर के अनुसार पाँच मुसलमान राज्य-दिल्ली, गुजरात, बहमनी, मालवा तथा बंगाल, दो काफिर राज्य- विजय नगर, मेवाड)
पानीपत की लडाई से पहले बाबर ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किया
पानीपत की लडाई से पहले भारतीय क्षेत्रों पर बाबर ने चार बार आक्रमण किया बाबर भारत खैबर दर्रे से होकर आया था और सबसे पहली बार इसने 1519 ई में भारत पर आक्रमण किया था
बाबर के प्रमुख युध्द
बाबर के चार प्रमुख युध्द है-
पानीपत का युध्द
पानीपत का युध्द भारत मे इसे लाहौर के गवर्नर और इब्राहिम लोदी चाचा दौलत खाँ ने अपने पुत्र बिलाबल खाँ और बहलोल लोदी के पुत्र आलम खाँ को बाबर को भारत पर आक्रमण करने हेतु आमंत्रित करने के लिए भेजा गया कहीं कहीं उल्लेख मिलता है कि राणा ने भी बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए भेजा था
पानीपत का प्रथम युध्द बाबर ने अपने 12,000 सैनिकों के सहायोग से इब्राहिम लोदी की सेना को बहुत बुरी तरह परास्त किया इस युध्द में उसने अपनी प्रसिध्द तुलगुमा युध्द नीति का और तोप खाने का प्रयोग किया इस युध्द की खुशी में बाबर ने काबुल वासियों को एक-एक का सिक्का उपहार में दिया अपनी इस उदारता के कारण बाबर को कलंदर कहा गया
अपनी विजय के बाद बाबर ने 27 अप्रैल 1526 को दिल्ली में मुगल वंश के संस्थापक के रूप में अपना राज्यभिषेक कराया
पानीपत के युध्द के समय भारत की राजनैतिक शक्ति अफगानों और राजपूतों में बँटी थी इस राजनीतिक शक्ति पर अधिकार के उद्देश्य से बाबर ने खानवा और घाघरा का युध्द लडा
बाबर की तुलगुमा नीति क्या थी
तुलगुमा नीति- तुलगुमा के अंतर्गत सेनायें तीन ओर से आक्रमण करती है
खानवा का युध्द
खानवा का युध्द 16 मार्च 1527 मे बाबर और मेवाड के राजा राणा सांगा के बीच हुआ इस युध्द में विजय के बाद बाबर ने गाजी की उपाधि धारण की
चंदेरी का युध्द
चंदेरी का युध्द 29 जनवरी 1528 को बाबर और चंदेरी के शासक मेधनीय राय के बीच हुआ युध्द में बाबर विजयी रहा
घाघरा का युध्द
घाघरा का युध्द में घघर, बिहार नदी के तट पर बाबर ने अफगानों को पराजित किया मध्यकाल का यह पहला युध्द था जल और थल दोनो में लडा गया था ये बाबर द्वारा लडी गई अंतिम लडाई थी
बाबर की अन्य रचना कौन सी थी
बाबर की एक और रचना तुजुक-ए-बाबरी है बाबर ने इसकी तुर्की में रचना की थी बाबर की इस रचना को अकबर ने अब्दुर्रहीम खानेखाना के द्वारा तुर्की से फारसी भाषा में रुपांतरित कराया
बाबर की संतानें
बाबर के चार पुत्र हुमायुँ, अस्करी, कामरान, हिंदाल थे व एक पुत्री गुलबदन बेगम थी
गुलबदन बेगम
गुलबदन बेगम बाबर की पुत्री थी उसने हुमायूँनामा की रचना की जिसमे आधे मे हुमायूँ का व आधे में बाबर का वर्णन मिलता है
"लेनपूल के अनुसार बाबर एक सैनिक था, साम्राज्य का निर्माता नहीं"
बाबर की मृत्यु
26 दिसम्बर 1530 को बाबर की मृत्यु हो गई और उसे काबुल में दफनाया गया बाबर ने हुमायूँ को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया
कौन था हुमायुँ
नासुरुद्दीन मुहम्मद हुमायुँ बाबर का सबसे बडा पुत्र था, बाबर की मृत्यु के तीन दिन पश्चात हुमायुँ का राज्याभिषेक 30 दिसम्बर 1530 आगरा के किले में समपन्न हुआ
हुमायुँ का जन्म
हुमायुँ का जन्म 6 मार्च 1508 को काबुल में हुआ था हुमायुँ के तीन भाई कमरान, असकरी व हिंदाल थे तथा बहन गुलबदन बेगम थी
हुमायुँ की माता
हुमायुँ की माता माहम बेगम (शिया मतावलंबी) हिरातके हुसैन बेकरा की पुत्री थी
ये थी हुमायुँ की सबसे बडी भूल
हुमायुँ ने गद्दी पर बैठने के बाद अपना सारा साम्राज्य अपने भाईयों के बीच बाँट दिया ये इसकी सबसे बडी प्रशासनिक भूल भी थी
ज्योतिष में विश्वास
हुमायुँ ज्योतिष में बहुत विश्वास रखता था वह सातों दिन सात रंग के कपडे पहनता था
कोहिनूर हीरा
बाबर के काल में ही हुमायुँ ने आगरा को जीता और बाबर के आगरा पहुँचने पर कोहिनूर हीरा बाबर को सौंपा
विभिन्न तथ्य
प्रसिध्द इतिहासकार रसब्रुक विलियम्स के अनुसार – “मुगल शासक बाबर ने अपने पुत्र के लिए ऐसा साम्राज्य छोडा जो केवल युध्द की परिस्थितियों में ही संगठित रखा जा सकता था और शांति के समय के लिए निर्बल, रचना विहीन एवं आधार विहीन था
बाबर का वजीर मीर निजामुद्दीन खलीफा मुगल साम्राज्य का मेंहदी ख्वाजा (बाबर की बडी बहन का पति) को सौंपना चाहता था लेकिन बाद में वजीर ने हुमायुँ को ही शासन तंत्र चलाने को कहा
हुमायुँ का विवाह
हुमायुँ का विवाह हमीदा बानो से 1541 में हुआ ये उस वक्त निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहा था हमीदा बानो बेगम फार्स के शिया मतावलंवी मीर अकबर अली जामी की पुत्री थी
शेर खां का आत्मसमर्पण
1532 ई. मे हुमायुँ ने चुनारगढ का किला जीता वह किला शेर खां के अधीन था शेर खां ने आत्मसमर्पण कर दिया और किले को शेर खां के आधिपत्य में ही रहने दिया
चौसा का युध्द (war of chausa)
आगे चलकर शेर खां ने अपनी स्थिति बहुत मजबूत कर ली और 26 जून 1539 को चौसा का युध्द हुमायुँ से किया चौसा के युध्द में हुमायुँ की पराजय हुई और चौसा का युध्द हुमायुँ के पतन का कारण बना
चौसा के युध्द के बाद हुमायुँ को निजाम नामक भिश्ती ने बचाकर आगरा पहुँचाया इस भिश्ती को हुमायुँ ने एक दिन का राजा भी बनाया था
शेर खां ने शेरशाह की उपाधि कब ग्रहण की
चौसा का युध्द जीतने के बाद शेर खां ने शेरशाह की उपाधि ग्रहण की व अपने नाम का खुतवा पढवाया व सिक्के चलवाये
कन्नौज का युध्द
हुमायुँ व शेरशाह के बीच फिर एक युध्द हुआ 17 मई 1540 को कन्नौज या बिलग्राम युध्द हुआ जिसमें हुमायुँ पराजित होकर निर्वासित जीवन जीने के लिए विवश हुआ
हुमायुँ ने 1540 ई. से 1555 ई. तक निर्वासित जीवन व्यतीत किया इस निर्वासित जीवन में उसके साथ उसका छोटा भाई हिंदाल उसके साथ था
हुमायुँ ने ईरान के शाह तहमास्प की सहायता पाकर भारत को पुन: जीतने का प्रयास किया
शेरशाह की मृत्यु
1545 में शेरशाह की मृत्यु हो गई और 1553 में शेरशाह के पुत्र इस्लाम शाह की भी मृत्यु हो गई जिससे हुमायुँ का मनोबल बढ गया और वह भारत जीतने को प्रयासरत हुआ
मच्छीवाडा युध्द (war of machchiwada)
12 मई 1555 ई. को मच्छीवाडा के युध्द में हुमायुँ ने सिकंदर सूर को पराजित कर दूसरी बार मुगल साम्राज्य की स्थापना की
हुमायुँ ने दिल्ली में पुन: अपने को भारत का बादशाह घोषित किया
हुमायुँ की मृत्यु
24 मई 1556 ई. को दीनपहनाह पुस्तकालय की सीढियों से उतरते वक्त फिसल कर गिरने के कारण हुमायुँ की मृत्यु हो गई
" लेनपूल के शब्दों में “हुमायुँ जीवन भर लुढकता रहा”
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1. गुलाम वंश
2. सामान्य ज्ञान प्रश्न
3. करंट अफेयर जनवरी 2016
मुगल वंश की स्थापना कैसे हुई
1526 ई. में बाबर और इब्राहिम लोदी की सेना के बीच पानीपत के मैदान में युध्द हुआ इस युध्द को पानीपत का प्रथम युध्द कहा जाता है इस युध्द में इब्राहिम लोदी मारा गया और बाबर ने मुगल सत्ता की स्थापना की पानीपत का युध्द भारतीय इतिहास का प्रमुख युध्द था इसके पश्चात ही भारत में मुगल सत्ता की स्थापना हुई
बाबर का संक्षिप्त परिचय
मुगल वंश के संस्थापक बाबर का शासन काल 1526 ई. से 1530 ई. तक चला बाबर का पूरा नाम जहीरूद्दीन मोहम्मद बाबर था
बाबर का जन्म 14 फरवरी 1483 को फरगना मे हुआ था बाबर चगताई तुर्क था अपने पिता उमर शेख की ओर से बाबर तैमूर का वंशज था और अपनी माँ कुतलग निशा की ओर से चंगेज खाँ का वंशज था
11 वर्ष की उम्र में 1494 ई. में यह फरगना का शासक बना 1508 में इसने कंधार पर विजय प्राप्त की यही पर इसके पुत्र हुमायूँ का जन्म हुआ
बाबर कौन सी उपाधि लेना शुरु किया
इसने अपनी सेना में तोप शामिल की और जो पूर्व के सुल्तान हुआ करते थे वो मिर्जा की उपाधि देते थे किंतु इसने ‘पादशाह’ की उपाधि लेना शुरू किया इसने पादशाह की उपाधि ली
बाबर वैसे तो सुन्नी मुसलमान था पर उसने कुछ समय के लिए शिया मत भी स्वीकार किया था (ईरान के शाह से सहायता प्राप्त करने के लिए)
भारत पर आक्रमण करने से पूर्व बाबर ने किन -किन स्थानों पर विजय प्राप्त की
भारत पर आक्रमण करने से पूर्व ये काबुल, कंधार व समकंद आदि पर विजय प्राप्त कर चुका था
बाबर की आत्मकथा
बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा लिखी उसमें उसने लिखा है जब मैंने हिंदुस्तान विजित किया उस समय हिंदुस्तान में पाँच मुसलमान शासकों तथा दो काफिर बादशाहों का शासन था(बाबर के अनुसार पाँच मुसलमान राज्य-दिल्ली, गुजरात, बहमनी, मालवा तथा बंगाल, दो काफिर राज्य- विजय नगर, मेवाड)
पानीपत की लडाई से पहले बाबर ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किया
पानीपत की लडाई से पहले भारतीय क्षेत्रों पर बाबर ने चार बार आक्रमण किया बाबर भारत खैबर दर्रे से होकर आया था और सबसे पहली बार इसने 1519 ई में भारत पर आक्रमण किया था
बाबर के प्रमुख युध्द
बाबर के चार प्रमुख युध्द है-
पानीपत का युध्द
पानीपत का युध्द भारत मे इसे लाहौर के गवर्नर और इब्राहिम लोदी चाचा दौलत खाँ ने अपने पुत्र बिलाबल खाँ और बहलोल लोदी के पुत्र आलम खाँ को बाबर को भारत पर आक्रमण करने हेतु आमंत्रित करने के लिए भेजा गया कहीं कहीं उल्लेख मिलता है कि राणा ने भी बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए भेजा था
पानीपत का प्रथम युध्द बाबर ने अपने 12,000 सैनिकों के सहायोग से इब्राहिम लोदी की सेना को बहुत बुरी तरह परास्त किया इस युध्द में उसने अपनी प्रसिध्द तुलगुमा युध्द नीति का और तोप खाने का प्रयोग किया इस युध्द की खुशी में बाबर ने काबुल वासियों को एक-एक का सिक्का उपहार में दिया अपनी इस उदारता के कारण बाबर को कलंदर कहा गया
अपनी विजय के बाद बाबर ने 27 अप्रैल 1526 को दिल्ली में मुगल वंश के संस्थापक के रूप में अपना राज्यभिषेक कराया
पानीपत के युध्द के समय भारत की राजनैतिक शक्ति अफगानों और राजपूतों में बँटी थी इस राजनीतिक शक्ति पर अधिकार के उद्देश्य से बाबर ने खानवा और घाघरा का युध्द लडा
बाबर की तुलगुमा नीति क्या थी
तुलगुमा नीति- तुलगुमा के अंतर्गत सेनायें तीन ओर से आक्रमण करती है
खानवा का युध्द
खानवा का युध्द 16 मार्च 1527 मे बाबर और मेवाड के राजा राणा सांगा के बीच हुआ इस युध्द में विजय के बाद बाबर ने गाजी की उपाधि धारण की
चंदेरी का युध्द
चंदेरी का युध्द 29 जनवरी 1528 को बाबर और चंदेरी के शासक मेधनीय राय के बीच हुआ युध्द में बाबर विजयी रहा
घाघरा का युध्द
घाघरा का युध्द में घघर, बिहार नदी के तट पर बाबर ने अफगानों को पराजित किया मध्यकाल का यह पहला युध्द था जल और थल दोनो में लडा गया था ये बाबर द्वारा लडी गई अंतिम लडाई थी
बाबर की अन्य रचना कौन सी थी
बाबर की एक और रचना तुजुक-ए-बाबरी है बाबर ने इसकी तुर्की में रचना की थी बाबर की इस रचना को अकबर ने अब्दुर्रहीम खानेखाना के द्वारा तुर्की से फारसी भाषा में रुपांतरित कराया
बाबर की संतानें
बाबर के चार पुत्र हुमायुँ, अस्करी, कामरान, हिंदाल थे व एक पुत्री गुलबदन बेगम थी
गुलबदन बेगम
गुलबदन बेगम बाबर की पुत्री थी उसने हुमायूँनामा की रचना की जिसमे आधे मे हुमायूँ का व आधे में बाबर का वर्णन मिलता है
"लेनपूल के अनुसार बाबर एक सैनिक था, साम्राज्य का निर्माता नहीं"
बाबर की मृत्यु
26 दिसम्बर 1530 को बाबर की मृत्यु हो गई और उसे काबुल में दफनाया गया बाबर ने हुमायूँ को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया
कौन था हुमायुँ
नासुरुद्दीन मुहम्मद हुमायुँ बाबर का सबसे बडा पुत्र था, बाबर की मृत्यु के तीन दिन पश्चात हुमायुँ का राज्याभिषेक 30 दिसम्बर 1530 आगरा के किले में समपन्न हुआ
हुमायुँ का जन्म
हुमायुँ का जन्म 6 मार्च 1508 को काबुल में हुआ था हुमायुँ के तीन भाई कमरान, असकरी व हिंदाल थे तथा बहन गुलबदन बेगम थी
हुमायुँ की माता
हुमायुँ की माता माहम बेगम (शिया मतावलंबी) हिरातके हुसैन बेकरा की पुत्री थी
ये थी हुमायुँ की सबसे बडी भूल
हुमायुँ ने गद्दी पर बैठने के बाद अपना सारा साम्राज्य अपने भाईयों के बीच बाँट दिया ये इसकी सबसे बडी प्रशासनिक भूल भी थी
ज्योतिष में विश्वास
हुमायुँ ज्योतिष में बहुत विश्वास रखता था वह सातों दिन सात रंग के कपडे पहनता था
कोहिनूर हीरा
बाबर के काल में ही हुमायुँ ने आगरा को जीता और बाबर के आगरा पहुँचने पर कोहिनूर हीरा बाबर को सौंपा
विभिन्न तथ्य
प्रसिध्द इतिहासकार रसब्रुक विलियम्स के अनुसार – “मुगल शासक बाबर ने अपने पुत्र के लिए ऐसा साम्राज्य छोडा जो केवल युध्द की परिस्थितियों में ही संगठित रखा जा सकता था और शांति के समय के लिए निर्बल, रचना विहीन एवं आधार विहीन था
बाबर का वजीर मीर निजामुद्दीन खलीफा मुगल साम्राज्य का मेंहदी ख्वाजा (बाबर की बडी बहन का पति) को सौंपना चाहता था लेकिन बाद में वजीर ने हुमायुँ को ही शासन तंत्र चलाने को कहा
हुमायुँ का विवाह
हुमायुँ का विवाह हमीदा बानो से 1541 में हुआ ये उस वक्त निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहा था हमीदा बानो बेगम फार्स के शिया मतावलंवी मीर अकबर अली जामी की पुत्री थी
शेर खां का आत्मसमर्पण
1532 ई. मे हुमायुँ ने चुनारगढ का किला जीता वह किला शेर खां के अधीन था शेर खां ने आत्मसमर्पण कर दिया और किले को शेर खां के आधिपत्य में ही रहने दिया
चौसा का युध्द (war of chausa)
आगे चलकर शेर खां ने अपनी स्थिति बहुत मजबूत कर ली और 26 जून 1539 को चौसा का युध्द हुमायुँ से किया चौसा के युध्द में हुमायुँ की पराजय हुई और चौसा का युध्द हुमायुँ के पतन का कारण बना
चौसा के युध्द के बाद हुमायुँ को निजाम नामक भिश्ती ने बचाकर आगरा पहुँचाया इस भिश्ती को हुमायुँ ने एक दिन का राजा भी बनाया था
शेर खां ने शेरशाह की उपाधि कब ग्रहण की
चौसा का युध्द जीतने के बाद शेर खां ने शेरशाह की उपाधि ग्रहण की व अपने नाम का खुतवा पढवाया व सिक्के चलवाये
कन्नौज का युध्द
हुमायुँ व शेरशाह के बीच फिर एक युध्द हुआ 17 मई 1540 को कन्नौज या बिलग्राम युध्द हुआ जिसमें हुमायुँ पराजित होकर निर्वासित जीवन जीने के लिए विवश हुआ
हुमायुँ ने 1540 ई. से 1555 ई. तक निर्वासित जीवन व्यतीत किया इस निर्वासित जीवन में उसके साथ उसका छोटा भाई हिंदाल उसके साथ था
हुमायुँ ने ईरान के शाह तहमास्प की सहायता पाकर भारत को पुन: जीतने का प्रयास किया
शेरशाह की मृत्यु
1545 में शेरशाह की मृत्यु हो गई और 1553 में शेरशाह के पुत्र इस्लाम शाह की भी मृत्यु हो गई जिससे हुमायुँ का मनोबल बढ गया और वह भारत जीतने को प्रयासरत हुआ
मच्छीवाडा युध्द (war of machchiwada)
12 मई 1555 ई. को मच्छीवाडा के युध्द में हुमायुँ ने सिकंदर सूर को पराजित कर दूसरी बार मुगल साम्राज्य की स्थापना की
हुमायुँ ने दिल्ली में पुन: अपने को भारत का बादशाह घोषित किया
हुमायुँ की मृत्यु
24 मई 1556 ई. को दीनपहनाह पुस्तकालय की सीढियों से उतरते वक्त फिसल कर गिरने के कारण हुमायुँ की मृत्यु हो गई
" लेनपूल के शब्दों में “हुमायुँ जीवन भर लुढकता रहा”
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